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जो सही वक्त पर सही चाल चलने से चूक जाते हैं, वे अंततः खेल से बाहर हो जाते हैं।
इतिहास पारिस्थितिकी के समान नहीं होता, मनुष्य घटनाओं के बारे में निर्णय लेते हैं और सोचते हैं।
मेरा विचार है कि कभी भी अच्छी महिला इतिहासकार की कमी रही है, और मुझे यह भी लगता है कि यह बिल्कुल ही कहा जाना चाहिए।
हर इतिहासकार के जीवन में एक निजी अटारी (पर्च) होती है, जहाँ से वह दुनिया का मुआयना करता है।
सांस्कृतिक विद्रोह की परिघटना; जो परिचालक न होकर लाक्षणिक होती है, सर्वाधिक दिखाई पड़ती है।
यह बिलकुल आसान नहीं है कि ख़तरा किस ढंग से ख़तरनाक है, यह देखा जा सके।
बौद्धिक स्तर एक व्यापक फ़र्क़ उपस्थित करता है। जहाँ के लोगों के विषय में आपको पता होता है कि वहाँ पर आप कुछ अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन जहाँ पर लोगों के सांस्कृतिक और शैक्षणिक विषय के बारे में पता नहीं होता है, वहाँ आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।
अतिरेकों के युग की शुरुआत भारी उथल-पुथल से हुई; जो केवल यूरोप में ही केंद्रित नहीं थी, साम्राज्यों और उपनिवेशों ने इसे पाँचों महाद्वीपों तक विस्तार दिया था।
किसी भी समय से ज़्यादा आज हमारे लिए इतिहासकार महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से संशयवादी इतिहासकार।
जिन लोगों ने महिलाओं की भूमिका का सही आकलन किया है, उन्होंने यह जाना है कि समाज वास्तव में दो लिंग से ही जाना जाता है, अस्तित्व पाता है बजाए एक लिंग के समाज के।
यह अधिक बेहतर है कि आप अपने आप को खोलकर रख दे, ताकि दूसरे तरफ़ की आलोचना प्राप्त कर सकें।