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परंतु इस संसार में मृत्यु और करों के अतिरिक्त किसी वस्तु को भी अवश्यंभावी नहीं कहा जा सकता।
जब तुम किसी व्यक्ति से बोलो, तो उसके नेत्रों की ओर देखो; जब वह तुम से बोले, तो तुम उसके मुख की ओर देखो।
कभी भी अच्छा युद्ध या बुरी शांति नाम की वस्तु नहीं
अज्ञानी मूर्ख की अपेक्षा पठित मूर्ख बड़ा मूर्ख होता है।
हो सकता है कि दीर्घ जीवन पर्याप्त अच्छी न हो परंतु अच्छा जीवन पर्याप्त दीर्घ होता है।