सिपाही यह कहे कि हमें लड़ना तो है, मगर वे हथियार नहीं रखने हैं जो सेनापति बतलाता है, तो वह लड़ाई नहीं चल सकती।
उत्कृष्ट योद्धा अनुशासनप्रिय होता है और इसी अनुशासन ने अश्वत्थामा को निगल लिया।
धुआँ देने के लिए मत जल। ज़ोर-ज़ोर से प्रज्वलित हो और देगपूर्वक आक्रमण करके शत्रु सैनिकों का संहार कर डाल। तू एक मुहूर्त या एक क्षण के लिए भी वैरियों के मस्तक पर जलती हुई आग बनकर छा जा।
एक सैनिक यह चिंता कब करता है कि उसके बाद उसके काम का क्या होगा? वह तो अपने वर्तमान कर्त्तव्य की ही चिंता करता है।
योद्धा का आवेश हमेशा चढ़ा हुआ होता है, लेकिन उसका मन भोला होता है। श्रद्धालु होता है।
सैनिक की तरह लड़ने का अर्थ है थकान के बावजूद लड़ते जाना।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere