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समुद्र पर कविताएँ

पृथ्वी के तीन-चौथाई

हिस्से में विशाल जलराशि के रूप में व्याप्त समुद्र प्राचीन समय से ही मानवीय जिज्ञासा और आकर्षण का विषय रहा है, जहाँ सभ्यताओं ने उसे देवत्व तक सौंपा है। इस चयन में समुद्र के विषय पर लिखी कविताओं का संकलन किया गया है।

पहाड़ पर चढ़ने के लिए

पद्मजा घोरपड़े

होना

सुघोष मिश्र

समुद्र की मछली

कुँवर नारायण

समुद्री पानी का गीत

फेदेरीको गार्सिया लोर्का

सागर शब्द है शुष्क

शुन्तारो तानीकावा

समुद्र और सामुद्रिक

कानेको मिसुजु

पानी में आदमी

निकोलाय ज़बोलोत्स्की

सागर से

अलेक्सांद्र पूश्किन

बूढ़ा मछुआरा

यानिस रित्सोस

लालसा

नाज़िम हिकमत

मूँगा

एवॉ तोथ

सागर तट का घर

यूजीनियो मोंताले

घटना

ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त

शोकगान

होर्खे लुइस बोर्खेस

दोपहर

यानिस रित्सोस

साँझ में समुद्र

रमेश क्षितिज

मछली

कानेको मिसुजु

समुद्र

लेओनार्दो सानउऐसा

तरंगिका

आचार्य ज़ौजी

समुद्र में संग्राम

ज्योर्ज सेफ़ेरिस

पूरी रात

केशव तिवारी

समुद्र

नरेश सक्सेना

क्षुधित सागर

ह्यु मैक्डायर्मिड

बंदरगाह

मनीषा जोषी

एक मछली से बातचीत

सविता भार्गव

नदियाँ

सौरभ अनंत

भीगना

अमेय कांत

दूर के शहर

सौरभ अनंत

कन्याकुमारी

दूधनाथ सिंह

प्रेम

दुर्गेश कुमार सजल

सागर

योसिप पूपाचिच

ज़िद मछली की

इला कुमार

एक ही सपना

सुधा उपाध्याय

मल्लाह का शोकगीत

नीलेश रघुवंशी

लूनी नदी

दीपक जायसवाल

देह का नमक

नित्यानंद गायेन

प्रेम का सागर

सीमा असीम सक्सेना

समुद्र

रमेश प्रजापति

रत्नगर्भा

कलानाथ मिश्र

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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