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संबंध पर ग़ज़लें

कुछ कहल ना

अशोक द्विवेदी

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

घर अन्हरिया के सुरूज

मिथिलेश ‘गहमरी’

साँस पर राग

गहबर गोवर्द्धन

उमिर के सँवारत

कृष्णानन्द कृष्ण

तनी देख लीं ना

मिथिलेश ‘गहमरी’

कहे के रहत बानी

मिथिलेश ‘गहमरी’

के बा आपन, कवन पराया

ब्रजभूषण मिश्र

केहू न पास बा

ब्रजभूषण मिश्र

हमरा जिनगी में भोर

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

प्यार जग के सार

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

पूछत बा लोग

जौहर शफियाबादी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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