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मनुष्य पर दोहे

फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।

कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार

निज़ाम फतेहपुरी

चमक-दमक को देखकर, दुनिया में इंसान।

भूल गया है मौत को, कितना है नादान॥

निज़ाम फतेहपुरी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere