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मनुष्यता पर दोहे

फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।

कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार

निज़ाम फतेहपुरी

मुख ब्राह्मण कर क्षत्रिय, पेट वैश्य पग शुद्र।

इ अंग सबही जनन में, को ब्राह्मण को शुद्र॥

मीतादास

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere