फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
मुख ब्राह्मण कर क्षत्रिय, पेट वैश्य पग शुद्र।
इ अंग सबही जनन में, को ब्राह्मण को शुद्र॥
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
मुख ब्राह्मण कर क्षत्रिय, पेट वैश्य पग शुद्र।
इ अंग सबही जनन में, को ब्राह्मण को शुद्र॥
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere