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मनुष्य पर गीत

लगी जाई भूख त का खइबा हो

रामजियावान दास ‘बावला’

कोउ न बाँचै तकदीर

अशोक अज्ञानी

लौ जरे अविरल हो...

अशोक द्विवेदी

कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइलै

रामजियावान दास ‘बावला’

दिल के भीतर

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

समय कइसन आ गइल

रमाकान्त मुकुल

आदमी बा बहुते घवाइल

ब्रजभूषण मिश्र

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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