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मनुष्य पर गीत

लगी जाई भूख त का खइबा हो

रामजियावान दास ‘बावला’

कोउ न बाँचै तकदीर

अशोक अज्ञानी

लौ जरे अविरल हो...

अशोक द्विवेदी

कउने नरेसवा क देसवा उजरि गइलै

रामजियावान दास ‘बावला’

दिल के भीतर

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

समय कइसन आ गइल

रमाकान्त मुकुल

आदमी बा बहुते घवाइल

ब्रजभूषण मिश्र

मज़हब-मज़हब करते-करते

विकास आर्य स्वप्न

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव 2026

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