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दिल पर ग़ज़लें

कवियों-शाइरों के घर

दिल या हृदय एक प्रिय शब्द की तरह विचरता है, जहाँ दिल की बातें और दिल के बारे में बातें उनकी कविताई में दर्ज होती रहती हैं। यह चयन दिल पर ज़ोर रखती ऐसी ही कविताओं में से किया गया है।

चढ़ल बसन्त में

अशोक द्विवेदी

जहर नस-नस चढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

हवा में बा

जगन्नाथ

साँस पर राग

गहबर गोवर्द्धन

तीर करेजा के

मिथिलेश ‘गहमरी’

दिल में जैसे धड़कन

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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