Font by Mehr Nastaliq Web

ऊब पर कविताएँ

ऊब एक मनोभाव है जो बोरियत,

उदासी, खिन्नता, एकरसता से उपजी बेचैनी का अर्थ देती है। कवि की ऊब कविता की संभावना भी हो सकती है।

लयताल

कैलाश वाजपेयी

आत्म-मृत्यु

प्रियंका दुबे

अगले सबेरे

विष्णु खरे

उदाहरण के लिए

नरेंद्र जैन

ऊब

पाब्लो नेरूदा

थकन

सारुल बागला

दुपहर

हो चि मिन्ह

प्रेम

वाल्झीना मोर्त

कैमडेन 1892

होर्खे लुइस बोर्खेस

बेईमानी

अर्पिता राठौर

आत्मचित्र

निकानोर पार्रा

हुनर

सारुल बागला

कठ-करेज समय

रूपम मिश्र

कामकाजी कवि का एक दिन

प्रत्यूष चंद्र मिश्र

कम है कहा जाना

आन येदरलुंड

ऊब

सी. पी. कवाफ़ी

रसबोध

मलयज

सुखी आदमी की दिनचर्या

अरविंद चतुर्वेद

ऊब के बचाव में

मोनिका कुमार

रोज़मर्रा

सुधांशु फ़िरदौस

कगार

उद्गीथ शुक्ल

ऊब

पूनम सोनछात्रा

नदियाँ

सौरभ अनंत

फिर भी

हरि मृदुल

फ़ुरसत भरे इतवार

अनिमेष मुखर्जी

घर के भीतर

स्वप्निल श्रीवास्तव

अपने घर पर रहें

पंकज चतुर्वेदी

सुबह की शुरुआत

अनुपम सिंह

हो सकता था

नवीन सागर

तुम आधे हो

जतिन एंड विंग्स

दिन

राम जन्म पाठक

यह भी अच्छा हुआ

नरेंद्र जैन

ऊब के नीले पहाड़

लीना मल्होत्रा राव

दफ़्तर में धूप

राजेंद्र शर्मा

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए