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पुस्तक पर कविताएँ

पुस्तकें हमारे लिए नए

अनुभव और ज्ञान-संसार के द्वार खोलती हैं। प्रस्तुत चयन में ‘रोया हूँ मैं भी किताब पढ़कर’ के भाव से लेकर ‘सच्ची किताबें हम सबको अपनी शरण में लें’ की प्रार्थना तक के भाव जगाती विशिष्ट पुस्तक विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

किताब पढ़कर रोना

रघुवीर सहाय

किताबें

गौरव गुप्ता

कोई लाके मुझे दे

दामोदर अग्रवाल

किताबें

सफ़दर हाश्मी

किताबें

नवीन सागर

किताब

सौरभ अनंत

किताबें

सपना भट्ट

समर्पण

चेस्लाव मीलोष

मेरी किताबें

होर्खे लुइस बोर्खेस

प्रेम कविता

अर्पिता धमीजा

पुस्तकचिह्न

शांदोर कान्यादी

पीस एकॉर्ड

तरुण भारतीय

धरती की पुस्तक

बलराम कांवट

तत्काल स्थगित

सृष्टि वत्स

जिल्दसाज़

विनय सौरभ

मनुष्यता की रीढ़

ज्ञानेंद्रपति

पुस्तक मेले

संजय चतुर्वेदी

पुस्तकों के उपयोग

के. सच्चिदानंदन

दूसरा शेर

होर्खे लुइस बोर्खेस

औरों की तरह नहीं

शलभ श्रीराम सिंह

साहित्य में

संजय चतुर्वेदी

कविता के बदलते स्रोत

संजय चतुर्वेदी

जनगणित

संजय चतुर्वेदी

गुम हुई किताबें

प्रत्यूष चंद्र मिश्र

बढ़ई का बेटा

कृष्ण कल्पित

खुली किताब

उद्गीथ शुक्ल

दीमकें

नरेश सक्सेना

गंध

विनय सौरभ

किताब

सोनू यशराज

प्रूफ़रीडर्स

अविनाश मिश्र

एक औरत का संकल्प

ज्योति शर्मा

होंठों की जुंबिश

प्रदीप्त प्रीत

किताबें

आदित्य रहबर

त्रिभुज

जनमेजय

चौराहा और पुस्तकालय

खेमकरण ‘सोमन’

ख़तरे उठाकर

प्रफुल्ल शिलेदार

इतिहास की किताब

ज्योति शर्मा

अनुपस्थिति में

ज्योति शर्मा

पल भर की आज़ादी

मोहम्मद अनस

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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