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अज्ञात के एकांकी
शहीद झलकारीबाई
(सन् 1857 ई. अपने महल में रानी लक्ष्मीबाई। चिंतित अवस्था में। रानी वीर वेश में रानी के सामने नाना साहब और कुछ विश्वासपात्र सामंत बैठे हैं। पास ही एक पलंग पर रानी का दत्तक पुत्र दामोदर राव बैठा है।) लक्ष्मीबाई: झाँसी के वीरो अँग्रेज़ों की विशाल सेना
चतुर गीदड़
(पहला दृश्य) (स्थान-तालाब का किनारा) मगरमच्छ — (तालाब की ओर देखते हुए, अपने आप से) तालाब की सारी मछलियाँ तो मैं धीरे-धीरे चट कर गया। अब क्या खाऊँ? कई दिन से खाने को कुछ भी नहीं मिला। मुझे बहुत भूख लगी है। आज वह गीदड़ भी तालाब पर पानी पीने नहीं आया। (कछुए
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere