पाइथागोरस के उद्धरण
बहुत शब्दों में थोड़ा मत कहो, बल्कि थोड़े में बहुत कुछ कह दो।
जिसमें ख़ुद के लिए धैर्य नहीं, वह स्वतंत्र नहीं।
चुप रहो या शब्दों को मौन से ज़्यादा बेहतर होने दो।
‘हाँ’ और ‘नहीं’—सबसे पूर्वतन; सबसे छोटे शब्द हैं, जिनके प्रयोग को सबसे अधिक विचार चाहिए।
ग़ुस्से में अपने शब्दों को, अपने काम को सँभालो।
काम करो मस्त रहो, तुम्हारी बात करने की ज़िम्मेदारी बाक़ियों पर छोड़ दो।
डोरियों की गुंजन में ज्यामिति है, गोलकों के अंतराल में संगीत है।
बच्चों को शिक्षित करोगे तो इंसानों को सज़ा देने की ज़रूरत नहीं रह जाएगी।
उन विकल्पों का चयन करो, जो तुम्हारे शरीर से अधिक तुम्हारी आत्मा को मजबूत करे।
क्रोध मूर्खता से शुरू होता है, पश्चाताप पर ख़त्म।
तर्क शाश्वत है, बाक़ी सब नश्वर।