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भविष्य चाहे जितना भी सुखद हो, उस पर विश्वास न करो, भूतकाल की भी चिंता न करो, हृदय में उत्साह भरकर और ईश्वर पर विश्वास कर वर्तमान में कर्मशील रहो।
हम अपने विषय में धारणा इस आधार पर बनाते हैं कि हम क्या करने के योग्य हैं, दूसरे लोग हमारा मूल्याँकन हमने जो कुछ किया है, उससे करते हैं।
महापुरुषों की जीवनियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हम भी अपना जीवन महान बना सकते हैं और जाते समय अपने पगचिह्न समय की बालू पर छोड़ सकते हैं।