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Henry Wadsworth Longfellow

1807 - 1882

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भविष्य चाहे जितना भी सुखद हो, उस पर विश्वास करो, भूतकाल की भी चिंता करो, हृदय में उत्साह भरकर और ईश्वर पर विश्वास कर वर्तमान में कर्मशील रहो।

कला प्रकृति की पुत्री है।

पुस्तकें विचार की समाधियाँ हैं।

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हम अपने विषय में धारणा इस आधार पर बनाते हैं कि हम क्या करने के योग्य हैं, दूसरे लोग हमारा मूल्याँकन हमने जो कुछ किया है, उससे करते हैं।

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महापुरुषों की जीवनियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हम भी अपना जीवन महान बना सकते हैं और जाते समय अपने पगचिह्न समय की बालू पर छोड़ सकते हैं।

मृत्यु है ही नहीं! जो वैसा प्रतीत होता है, वह तो परिवर्तन है।

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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