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Bulleh Shah

1680 - 1757 | قصور, پنجاب

کی

मुल्ला और मशालची दोनों एक ही मत के हैं। औरों को तो ये प्रकाश देते हैं और स्वयं अंधकार में फँसे रहते हैं।

और कोई बातें हैं ही नहीं, केवल ईश्वर ईश्वर ही एक बात है। यह रोला कुछ तो इन विद्वानों ने और कुछ इन किताबों के झमेले ने मचा रखा है।

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गया जाने से बात समाप्त नहीं होती, वहाँ जाकर चाहे तू कितना ही पिंडदान दे। बात तो तभी समाप्त होगी, जब तू खड़े-खड़े इस 'मैं' को लुटा दे।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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