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मुल्ला और मशालची दोनों एक ही मत के हैं। औरों को तो ये प्रकाश देते हैं और स्वयं अंधकार में फँसे रहते हैं।
और कोई बातें हैं ही नहीं, केवल ईश्वर ईश्वर ही एक बात है। यह रोला कुछ तो इन विद्वानों ने और कुछ इन किताबों के झमेले ने मचा रखा है।