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बात करो मुझसे प्रेम की

baat karo mujhse prem ki

अनुवाद : सईद शेख़

आऊलिक्की ओकसानेन

अन्य

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आऊलिक्की ओकसानेन

बात करो मुझसे प्रेम की

आऊलिक्की ओकसानेन

और अधिकआऊलिक्की ओकसानेन

    बात करो मुझसे प्रेम की

    क्योंकि यदि आज बात करोगे, बात करोगे अँधेरी नदी से।

    उसका पानी रुकेगा नहीं

    नाव में आह्लादित दीप जलेगा नहीं

    मछलियों का अजीब, प्रसन्न झुंड गाएगा नहीं।

    मुझे देखो प्रेम से

    आने वाले कल

    क्योंकि यदि आज देखोगे, देखोगे पीला चाँद।

    उनका प्रकाश गर्माहट नहीं देगा

    उसके रक्त में अबाबील का पंख चक्कर नहीं काटता है

    उसमें कभी भी गिलहरी की बेरी जैसा स्वाद नहीं है।

    मेरे नज़दीक आओ

    आज, इस दिन

    आज चले गए, तो हमेशा के लिए चले जाओगे मुझसे।

    मैं तुम्हें पा नहीं सकूँगी

    तुम्हें जानना मैं कभी भी नहीं सीख पाऊँगी।

    कभी भी तुम्हारे हृदय की आवाज़ नहीं सुन पाऊँगी।

    मेरे नज़दीक आओ

    आज, इस दिन

    आओ और मुझसे बात करो, मुझे स्पर्श करो, मुझे देखो।

    मेरा दुःख बुझेगा नहीं

    अगर तुम मेरा हाथ छुए बग़ैर चले जाओगे

    मेरा दुःख बुझेगा नहीं, अगर तुम मुझसे मुँह फेर लोगे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : दरवाज़े में कोई चाबी नहीं (पृष्ठ 226)
    • संपादक : वंशी माहेश्वरी
    • रचनाकार : आऊलिक्की ओकसानेन
    • प्रकाशन : संभावना प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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