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अलावा

alawa

मिथलेश शरण चौबे

अन्य

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और अधिकमिथलेश शरण चौबे

    रात गए एक जंगल में प्रविष्ट हुआ मैं

    प्रविष्ट हुए के जंगल में दुनिया का जंगल था

    जहाँ कोई डेरा या चिह्न नहीं था उसे स्वप्न मानकर

    स्वप्न के डेरे या चिह्न में दुनिया खोजने लगा

    पर यह इतना सरल नहीं था

    इस सरल नहीं के दुख में कठिन से पाला पड़ा

    सरल या कठिन दुनिया के भीतर थे

    दुनिया के भीतर सरल या कठिन के अलावा भी बहुत कुछ था

    यह सही है कि इस अलावा से कोई मतलब नहीं था मुझे

    लेकिन सबसे अधिक इसी अलावा को समय दिया

    तो जिस जंगल में प्रविष्ट हुआ था मैं रात गए

    उस जंगल में अब मेरे अलावा सब कुछ बचा हुआ है।

    स्रोत :
    • रचनाकार : मिथलेश शरण चौबे
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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