साहित्य और संस्कृति की घड़ी
26 दिसम्बर 2025
यह एक विरल संयोग है कि विनोद कुमार शुक्ल जितने बड़े कवि हैं, उतने ही बड़े कथाकार भी हैं। यह बात हिंदी के बहुत कम लेखकों में है। यदि मैं हिंदी की परंपरा में उन्हें देखूँ तो यह बहुत विशाल है—यह काम इतिह
विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों वाली अपेक्षाओं के साथ उनकी कहानियाँ पढ़ने पर किसी को भी कुछ निराशा हो सकती है। कहानियाँ वैसे भी उन्होंने अधिक नहीं लिखी हैं। जो लिखी हैं, उनमें न तो मध्यवर्गीय विडंबनाओ
विनोद कुमार शुक्ल के मुझ सरीखे पुराने पाठक और उनके लगातार बढ़ते जा रहे नए पाठक; सबसे पहले तो यह समझ जाते हैं कि उनका यह कवि-गल्पकार सिर्फ़ ‘अच्छा’ नहीं है, बल्कि उसे ऐसा कहना और मानना उसका और अपना अप
विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता है—‘आदिम रंग’। पहली पंक्ति प्रश्नवाचक है—आदिम रंग आदिम मनुष्य ने क्या देखा था? (प्रश्नवाचक चिह्न कवि की पंक्ति में नहीं है) फिर वह अनुमान या कल्पना करते हैं—सूर्यादय या
धर्मेंद्र के निधन पर एक व्यापक सामूहिक क्षति का एहसास हमें न्यूज़ चैनल्स पर दिखाई गईं ख़बरों और सोशल मीडिया पर दी गईं श्रद्धांजलियों से हुआ। धर्मेंद्र एक बड़े जनसमूह के नायक थे, जिन्होंने लंबे समय तक
13 नवम्बर 2025
यह सभा एक बंधु के निधन पर एक कवि के अपने रचना-क्षेत्र हो उठ जाने पर, दुःख प्रकट करने और शोक-संतप्त परिवार को हम सबकी संवेदना पहुँचाने के लिए एकत्र हुई है। बंधु की स्मृति से अभिभूत हो जाना स्वाभाविक ह
वर्ष 2025 गुजराती साहित्य के इतिहास में एक विशेष वर्ष है—इस वर्ष गुजराती भाषा और संस्कृति के एक विलक्षण साधक, फ़ादर वालेस (Father Carlos González Vallés) की जन्मशती मनाई जा रही है। फ़ादर वालेस का जन्
—किराया, साहब... —मेरे पास सिक्कों की खनक नहीं। एक काम करो, सीधे चल पड़ो 1/1 बिशप लेफ़्राॅय रोड की ओर। वहाँ एक लंबा साया दरवाज़ा खोलेगा। उससे कहना कि ऋत्विक घटक टैक्सी करके रास्तों से लौटा... जेबें
सो रहो मौत के पहलू में ‘फ़राज़’ नींद किस वक़्त न जाने आए और फिर वह सो गईं—चिर निद्रा में। यह 5 नवंबर 2024 की रात थी। बस एक दिन पहले ही वेंटिलेटर पर आई थीं। पर अब सबको लग ही रहा था कि अब नहीं लौ
असरानी एक असरानी के निधन पर हमें कितना ग़मगीन होना चाहिए राजेश खन्ना के निधन से ज़्यादा या राजेश खन्ना के निधन से कम? दो वह कहानी का हिस्सा थे पर कहानी उनके बारे में नहीं थी कभी वह न