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जूलिया क्रिस्तेवा

1941 | स्लीवेन

बुल्गारियाई-फ़्रांसीसी दार्शनिक, साहित्यिक समीक्षक, लेखिका, भाषाविद और मनोविश्लेषक।

बुल्गारियाई-फ़्रांसीसी दार्शनिक, साहित्यिक समीक्षक, लेखिका, भाषाविद और मनोविश्लेषक।

जूलिया क्रिस्तेवा के उद्धरण

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प्रेम वह समय और स्थान है : जहाँ ‘मैं’ अपने आपको असाधारण बनने का अधिकार देती हूँ।

अनुवाद : सरिता शर्मा

अकारण और अंतहीन : संगीत, लय और नृत्य।

अनुवाद : सरिता शर्मा

माता-पिता से वंचित हो जाना—क्या स्वतंत्रता वहीं से शुरू होती है?

अनुवाद : सरिता शर्मा

दुखी व्यक्ति कट्टरपंथी और उदास नास्तिक होता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

वह विदेशी है, वह कहीं से भी नहीं है, वह हर जगह से है, दुनिया का नागरिक, महानगरीय है। उसे उसके मूल स्थान पर वापस भेजें।

अनुवाद : सरिता शर्मा

दुख को नाम देना, उसे बढ़ा-चढ़ाकर, उसके सबसे छोटे घटकों में विघटित करना—शोक को कम करने का निश्चित तरीक़ा है।

  • संबंधित विषय : दुख

अनुवाद : सरिता शर्मा

चूँकि उसके पास कुछ भी नहीं है, वह कुछ भी नहीं है : वह सब कुछ त्याग सकता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

दूसरों के लिए महत्त्वपूर्ण हुए बिना, कोई आपकी बात नहीं सुनता है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

क्या कोई इसके सिवाय किसी अन्य शर्त पर भी लिखता है कि वह असीम भाव-विरेचन के लिए दुर्दशा की स्थिति में होता है?

हमें यह मान लेना चाहिए कि कोई किसी दूसरे देश में इसलिए विदेशी बन जाता है, क्योंकि वह अंदर से पहले से ही विदेशी होता है?

  • संबंधित विषय : देश

अनुवाद : सरिता शर्मा

गौरव मानव-शरीर में अंतर्निहित है।

अनुवाद : सरिता शर्मा

धर्म के विश्लेषण-योग्य होने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि कोई ऐसा तरीक़ा है जिससे इसके बिना काम चलाया जा सके।

अनुवाद : सरिता शर्मा

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