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Amrit Lal Nagar

1916 - 1990 | اتر پردیش

کی

जड़-चेतनमय, विष अमृतमय, अंधकार-प्रकाशमय जीवन में न्याय के लिए कर्म करना ही गति है। मुझे जीना ही होगा, कर्म करना ही होगा। यह बंधन ही मेरी मुक्ति भी है। इस अंधकार में ही प्रकाश पाने के लिए मुझे भी जीना है।

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सत्य, आस्था और लगन जीवन-सिद्धि के मूल हैं।

कला जीवन का रस है।

उदारता और स्वाधीनता मिल कर ही जीवनतत्त्व है।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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