हँसी पर उद्धरण
हँसी एक भौतिक प्रतिक्रिया
है जो किसी आंतरिक या बाह्य उद्दीपन की अनुक्रिया के रूप में प्रकट होती है। इसे आनंद, ख़ुशी, राहत, सुख जैसी सकारात्मक भावावेश की श्रवण-योग्य अभिव्यक्ति माना जाता है। कई बार वह विलोम परिदृश्यों, जैसे : शर्मिंदगी, भ्रम या आश्चर्य की दशा में भी एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया के रूप में प्रकट होती है। इस चयन में हँसी विषय पर अभिव्यक्त उत्कृष्ट कविताओं को शामिल किया गया है।
झुर्रियाँ बस यह बताती हैं कि मुस्कान कहाँ थी।
मेरा दर्द हो सकता है कि किसी की हँसी का कारण बने, लेकिन मेरी हँसी कभी किसी के दर्द का कारण नहीं बननी चाहिए।
मुख को ही हँसाने वाली मित्रता कोई मित्रता नहीं है। हृदय को आनंदित करने वाली मित्रता ही मित्रता है।
सच्चे अर्थों में हँसना, अपने दर्द को स्वीकार कर उसे खेल की तरह लेना है।
वही चीज़ एक निगाह से देखें, ग़ुस्सा आता है। दूसरी निगाह से देखें, हँसी आती है। क्या अच्छा यह नहीं कि हम न ग़ुस्सा करें, न हँसें?
नक़ली मुस्कान ओढ़ लेना, अपना दर्द बयान करने से ज़्यादा आसान है।
तुम पाओगे कि जीवन अब भी सार्थक है, अगर तुम बस मुस्कुरा दो।
वह मुस्कराहट जो तहों में छिपे हुए मनुष्यत्व को निखारकर बाहर ले आती है, यदि सोद्देश्य हो तो, वह उसके सौंदर्य की वेश्यावृत्ति है।
मुस्कुराहट चेहरे को, मैले चेहरे को भी; बाग़ में बदल देती है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere