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वियोग पर गीत

वियोग संयोग के अभाव

या मिलाप न होने की स्थिति और भाव है। शृंगार में यह एक रस की निष्पत्ति का पर्याय है। माना जाता है कि वियोग की दशा तीन प्रकार की होती है—पूर्वराग, मान और प्रवास। प्रस्तुत चयन में वियोग के भाव दर्शाती कविताओं का संकलन किया गया है।

द्वितीया

अज्ञेय

शलभ मैं शापमय वर हूँ

महादेवी वर्मा

काहे जननी क सनेहिया परइला तोड़ के

रामजियावान दास ‘बावला’

अँगनामे

राम चैतन्य धीरज

कौशल्या राम से

रामजियावान दास ‘बावला’

ना अइलऽ बरिसात में

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

कानि रहल-ए कंगना

राम चैतन्य धीरज

सुविधा लेलक समाधि

मार्कण्डेय प्रवासी

सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय

रामजियावान दास ‘बावला’

कलकतवा से मोर पिया

महेन्द्र मिसिर

कवन बन गइलैं ललना हमार हो

रामजियावान दास ‘बावला’

विरह का जलजात

महादेवी वर्मा

सखि फागुन आइल

रामजियावान दास ‘बावला’

मारैला सवनवाँ कटार हो

रामजियावान दास ‘बावला’

इयाद उनकर सगर रात आवत रहल

तैयब हुसैन पीड़ित

नागिन गय, नाँच!

मार्कण्डेय प्रवासी

पुरवइया धीरे बहऽ

तैयब हुसैन पीड़ित

अँगनवा अन्हारे रहल

तैयब हुसैन पीड़ित

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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