यदि कठोर शब्दों या अपशब्दों का प्रयोग करने के बावजूद भी; नायिका नायक से प्रेम संबंध जोड़ना चाहती है, तो उसे पुनः वश में करने का प्रयत्न करना चाहिए।
युवती कन्या; वर-प्राप्ति के लिए उपाय करती हुई जिस नायक को आश्रय के योग्य, रतिसुख का हेतु, अपने अनुकूल एवं वशीभूत समझे—उस नायक का वरण कर ले।
नायक अपनी प्रेयसी नायिका को देर तक; बार-बार देखने के लिए अपने घर पर गोष्ठी का आयोजन करे, जिसमें और भी बहुत-सी लड़कियों को आहूत करे। उस गोष्ठी में नायक अन्य लड़कियों के साथ भी गोष्ठी-बातचीत छेड़ता रहे, जिससे उसकी प्रेयसी नायिका भी रुकी रहे। किंतु किसी से घुल-मिल कर बात न करे, क्योंकि स्त्रियाँ घुल-मिल कर बात करने वाले युवक नायक से प्रेम करने में हिचकती हैं और उन्हें कार्यसिद्धि में संदेह रहता है।
यदि नायिका किसी कारण से पुरुष के आलिंगन, अंगस्पर्श को अनजान की तरह सहन कर लेती है, तो उसे दुविधा में फँसी हुई समझ कर धीरतापूर्वक निरंतर प्रयत्न द्वारा वश में करना चाहिए।
यदि नायिका नायक के मिलने पर कठोर शब्दों में उसे ठुकरा दे, तो ऐसी नायिका की सर्वथा उपेक्षा कर देनी चाहिए।
जब नायिका अपने अंगों के हाव-भाव दिखा; सद्भाव प्रकट कर चुकी हो, तो निशानी के तौर पर अपनी कोई प्रिय वस्तु उपभोग के लिए नायिका को दे, और नायिका की कोई प्रिय वस्तु स्वयं उपभोग के लिए ले लेना चाहिए।
दूती बनकर नायिका के पास जाने वाली धाय की लड़की, नायिका को समझाए कि और वरों की अपेक्षा, यह वर सब वरों में श्रेष्ठ और विवाह करने के योग्य है। इसके साथ विवाह करके तुम अखंड सुख प्राप्त करोगी।
दूती को चाहिए कि वह स्वयं वर चुन लेने की नायिका को सलाह दे। अपनी बुद्धि और इच्छा से विवाह करके प्रसन्न रहने वाली सजातीय अन्य कन्याएँ तथा शकुंतला आदि की कहानियाँ सुनाकर, नायिका को गांधर्व विवाह के लिए प्रेरित करे और यह बताए कि धनी परिवार में अनेक पत्नियों वाले वर से शादी करके कन्याएँ बहुत दुःखी रहती हैं। अतः उसे अपनी इच्छा से अपने मनोऽनुकूल वर चुनना चाहिए और उसके साथ विवाह कर लेना चाहिए।
दूती को यह विश्वास हो जाए कि नायिका; नायक के प्रति पूर्ण रूप से अनुरक्त हो गई है, तो वह उस नायिका के मन से नायक के प्रति शंका, माता-पिता तथा गुरुजनों का भय और लज्जा निकाल दे।
अपनी सिद्ध कुशलता को जानकर; स्त्रियों के लक्षणों, हाव-भाव, संकेतों तथा उनकी कामनाओं को युक्ति से निश्चय करके, नायिका के विराग के कारणों को दूर करके, पुरुष अयत्नसाध्य स्त्रियों को वश में करने में सफल होता है।
गुणसंपन्न होने पर भी हीनकुल में उत्पन्न; कुलीन होने पर भी धनहीन (ग़रीब) घर की लड़की, जो समान अवस्था वाले कुलीन युवकों में विवाह के लिए याचित न की गई हो, माता-पिता से हीन होने के कारण संबंधियों के परिवार में पालित, युवावस्या को प्राप्त कन्या को अपने विवाह के लिए स्वयं प्रयत्न करना चाहिए।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere