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अतीत पर कविताएँ

अतीत का अभिप्राय है

भूतकाल, व्यतीत, बीत चुका समय, जिसका अस्तित्व या सत्ता समाप्त हो चुकी। प्रस्तुत चयन में अतीत के विभिन्न रंगों, धूप-छाया का प्रसंग लेती कविताओं का संकलन किया गया है।

पुराने दोस्त

शैलेंद्र साहू

मेज़

गिरिराज किराडू

सर्दी

रमेश क्षितिज

कमरा

बोरीस पस्तेरनाक

घर की याद

मारीना त्स्वेतायेवा

पुरानी चिट्ठियांँ

फैदोर त्यूतशेव

जब हेलेन जीती थी

विलियम बटलर येट्स

लाइम रेगिस स्टेशन

कोलिन फ़ाल्क

झलक

अलेक्सांद्र ब्लोक

अनुगूँज

अन्ना अख्मातोवा

छुरा

होर्खे लुइस बोर्खेस

खोए हुए की प्राप्ति (1982)

होर्खे लुइस बोर्खेस

पियानो

डी. एच. लॉरेंस

बूढ़ा मछुआरा

यानिस रित्सोस

अरी रूपसी, मेरे सम्मुख मत गाओ

अलेक्सांद्र पूश्किन

फ़ेहरिस्त

होर्खे लुइस बोर्खेस

कामना

शशि शेखर

एक थी हीर

सुतिंदर सिंह नूर

खूँटे से बँधे हुए

रामकृष्ण झा ‘किसुन’

अतीत

मारीआ मोंतेरो

व्यतीत

प्रकाश

बाबिय् यार

येव्गेनी येव्तुशेंको

इतिहासक गली

मायानंद मिश्र

सन्दर्भ : वर्तमान

रोशन जनकपुरी

वर्तमान है वह

संजीव गुप्त

भूतकाल को मत दोहराओ

विजयपाल सिंह बीदावत

मरे हुए परिंदे

सुजाता नारायण

स्वत्व

जगन्नाथ प्रसाद दास

बीतना

शालिनी सिंह

कोई नहीं सुनता

कुमार विक्रमादित्य

आउट स्विंग

संजय राय

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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