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मातृभाषा पर गीत

मातृभाषा किसी व्यक्ति

की वह मूल भाषा होती है जो वह जन्म लेने के बाद प्रथमतः बोलता है। यह उसकी भाषाई और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का अंग होती है। गांधी ने मातृभाषा की तुलना माँ के दूध से करते हुए कहा था कि गाय का दूध भी माँ का दूध नहीं हो सकता। कुछ अध्ययनों में साबित हुआ है कि किसी मनुष्य के नैसर्गिक विकास में उसकी मातृभाषा में प्रदत्त शिक्षण सबसे महत्त्वपूर्ण होता है। इस चयन में मातृभाषा विषयक कविताओं को शामिल किया गया है।

हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान

प्रतापनारायण मिश्र

कि आपन देसे भइल बिदेस!

तैयब हुसैन पीड़ित

विद्यापतिक नोर

गंगेश गुंजन

भोजपुरिया

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

प्रेमधरा

धीरेन्द्र प्रेमर्षि

मातृभाषा-प्रेम

धीरेन्द्र प्रेमर्षि

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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