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आधुनिकता पर कविताएँ

कोरोना का रिक

डब्ल्यू. एस. रेण्ड्रा

प्रेम

ईमान मर्सल

जलते हुए शहर में

सुभाष मुखोपाध्याय

वे दो

एलेन गिन्सबर्ग

नाइटक्लब

बिली कॉलिन्स

नवागंतुक जीव

थाङ्जम इबोपिशक सिंह

विनाएल

रिकार्दो पोलेंस

इलेक्ट्रॉनिक बूमरैंग

शांदोर कान्यादी

शतरंज का खेल

टी. एस. एलियट

अग्नि-दीक्षा

टी. एस. एलियट

सोभानाली

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

छीछाल्यादरि

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

आवहुँ लौटि विदेस दिवाने

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

लड़िके सब अँगरेज होइ गए

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

मिथिला मे स्वागत अछि अहाँक

सुमित मिश्र गुंजन

बदलाउ

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

"हम" अउ "तुम"

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

चलै लाग पछियाहु

भारतेंदु मिश्र

हाय राम का करी

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

आजादी

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

बुधिआरि

अशोक कुमार दत्त

दर्शन

जयंत शुक्ल

दुनिया चली गई आगे

मंगेश पाडगाँवकर

भारत के नए तीर्थ

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

जैव विकास

जनार्दन

न सीमा न सम्मति

कैलाश पुरी

ओज़ोन वैली

वसंत दत्तात्रेय गुर्जर

मशीनें

सुखपालवीर सिंह हसरत

विपर्यस्त

अनिल त्रिपाठी

मशीनी इंसान

अतिया दाऊद

आधुनिकता

रामनिवास जाजू

कुतुबमीनार के सामने

लक्ष्मीकांत मुकुल

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere