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स्मृति पर ग़ज़लें

स्मृति एक मानसिक क्रिया

है, जो अर्जित अनुभव को आधार बनाती है और आवश्यकतानुसार इसका पुनरुत्पादन करती है। इसे एक आदर्श पुनरावृत्ति कहा गया है। स्मृतियाँ मानव अस्मिता का आधार कही जाती हैं और नैसर्गिक रूप से हमारी अभिव्यक्तियों का अंग बनती हैं। प्रस्तुत चयन में स्मृति को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

कबो झील तितली

जौहर शफियाबादी

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

तहरा सुधियन के

अशोक द्विवेदी

तोहार देह के छूके हवा गुजर जाई

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

अहाँ जानै छी

राम चैतन्य धीरज

नींद के राह कहीं छूट रहल बा पाछे

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

याद के तहरे

जौहर शफियाबादी

रउआ कइसे ई बतिया भुला जाइले

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

उमिर के लास कान्ही

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

केहु अचके में अपना बना गइल बा

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

याद में तहरा

अशोक द्विवेदी

कढ़ावल प्रीत के के गीत

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

तोहार नयन सहज प्रेम बैन बोल गईल

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

कभी लौ का इधर जाना

डी. एम. मिश्र

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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