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स्मृति पर गीत

स्मृति एक मानसिक क्रिया

है, जो अर्जित अनुभव को आधार बनाती है और आवश्यकतानुसार इसका पुनरुत्पादन करती है। इसे एक आदर्श पुनरावृत्ति कहा गया है। स्मृतियाँ मानव अस्मिता का आधार कही जाती हैं और नैसर्गिक रूप से हमारी अभिव्यक्तियों का अंग बनती हैं। प्रस्तुत चयन में स्मृति को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

ये शरद के फूल

ओम निश्चल

वही मोरा गाँव

अन्नू रिज़वी

भूल जाता हूँ

अन्नू रिज़वी

किसे भूल जाऊँ?

शंभुनाथ सिंह

भूल जाना

गोपालदास नीरज

दो दिन होली रही गाँव में

ज्ञान प्रकाश आकुल

तब किसी की याद आती

गोपालदास नीरज

फूटल किरिन हजार...

अशोक द्विवेदी

मन का डूब जाना

अमन अक्षर

हम नदी के दो किनारे

विशाल समर्पित

जीवन : एक परिबोधन

छत्रानन्द सिंह झा

इयाद उनकर सगर रात आवत रहल

तैयब हुसैन पीड़ित

गामे मोन पड़ैए

कालीकान्त झा ‘बूच’

बिसरे ना पीया

भोलानाथ गहमरी

स्नेह-रिक्त की होयत मन?

छत्रानन्द सिंह झा

एक इहो दिन

शान्ति सुमन

बीतल दिन

रमाकान्त मुकुल

अहाँकेर बिन

शान्ति सुमन

इक टूटा-फूटा घर बूढ़ा

विभूति तिवारी

कतेक दिनपर

शान्ति सुमन

कहाँ गए वे दिन रोबीले

देवेंद्र कुमार बंगाली

यादों के टीले

देवेंद्र कुमार बंगाली

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere