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भूख पर ग़ज़लें

भूख भोजन की इच्छा प्रकट

करता शारीरिक वेग है। सामाजिक संदर्भों में यह एक विद्रूपता है जो व्याप्त गहरी आर्थिक असमानता की सूचना देती है। प्रस्तुत चयन में भूख के विभिन्न संदर्भों का उपयोग करती कविताओं का संकलन किया गया है।

बाढ़ आइल सिवान

मिथिलेश ‘गहमरी’

जहर नस-नस चढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

बलिगोबना सरकार छै

राम चैतन्य धीरज

धर्म- मजहब प आ

जौहर शफियाबादी

निर्दोष गाम

राम चैतन्य धीरज

काल्ह के दुख

मिथिलेश ‘गहमरी’

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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