Font by Mehr Nastaliq Web

दुख पर अनुवाद

दुख की गिनती मूल मनोभावों

में होती है और जरा-मरण को प्रधान दुख कहा गया है। प्राचीन काल से ही धर्म और दर्शन ने दुख की प्रकृति पर विचार किया है और समाधान दिए हैं। बुद्ध के ‘चत्वारि आर्यसत्यानि’ का बल दुख और उसके निवारण पर ही है। सांख्य दुख को रजोगुण का कार्य और चित्त का एक धर्म मानता है जबकि न्याय और वैशेषिक उसे आत्मा के धर्म के रूप में देखते हैं। योग में दुख को चित्तविक्षेप या अंतराय कहा गया है। प्रस्तुत संकलन में कविताओं में व्यक्त दुख और दुख विषयक कविताओं का चयन किया गया है।

आवाज़ें-74

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-30

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-150

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-98

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-56

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-41

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-46

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-65

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-77

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-129

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-118

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-109

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-91

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-193

अंतोनियो पोर्चिया

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

संबंधित विषय

Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here

रजिस्टर कीजिए