Font by Mehr Nastaliq Web

डर पर ग़ज़लें

डर या भय आदिम मानवीय

मनोवृत्ति है जो आशंका या अनिष्ट की संभावना से उत्पन्न होने वाला भाव है। सत्ता के लिए डर एक कारोबार है, तो आम अस्तित्व के लिए यह उत्तरजीविता के लिए एक प्रतिक्रिया भी हो सकती है। प्रस्तुत चयन में डर के विभिन्न भावों और प्रसंगों को प्रकट करती कविताओं का संकलन किया गया है।

आदमी के का भरोसा

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी के देख के

कृष्णानन्द कृष्ण

बह रहल बा

ए. कुमार ‘आँसू’

अब सुरक्षित कवन

अशोक द्विवेदी

हमरा हालात से

तैयब हुसैन पीड़ित

नइखे जानत के आवत बा

तैयब हुसैन पीड़ित

चमक दमक में

अशोक द्विवेदी

फूस के छप्पर

तैयब हुसैन पीड़ित

मुकरियाँ

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

क़द है पर बौने

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए