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लोकतंत्र पर गीत

लोकतंत्र जनता द्वारा,

जनता के लिए, जनता का शासन है। लोकतंत्र के गुण-दोष आधुनिक समय के प्रमुख विमर्श-विषय रहे हैं और इस संवाद में कविता ने भी योगदान किया है। प्रस्तुत चयन ऐसी ही कविताओं का है।

जनता के पलटनि

गोरख पांडेय

समाजवाद

गोरख पांडेय

समय का पहिया

गोरख पांडेय

बाजू, अछि जनतंत्र कतय?

मार्कण्डेय प्रवासी

अइसन लागल चोट

ब्रजभूषण मिश्र

आइ राजनीति

मार्कण्डेय प्रवासी

बारूद पर गाँव

ब्रजभूषण मिश्र

जयजयकार करैए लोक

मार्कण्डेय प्रवासी

दुपहरियाक रौदमे

गंगेश गुंजन

काले-काले बादल छाए

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

जनता के पलटनि

गोरख पांडेय

जव वोट मांगे अइले

गोरख पांडेय

सजी सुखवा लूटे रजधानी

ब्रजभूषण मिश्र

ना हटल मकड़जाला

तैयब हुसैन पीड़ित

कोनो नहि अन्तर

मार्कण्डेय प्रवासी

पंचन के प्रपंच में

ब्रजभूषण मिश्र

समाजवाद

गोरख पांडेय

घूमत बाटे शान से

ब्रजभूषण मिश्र

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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