Font by Mehr Nastaliq Web

दलित पर उद्धरण

हिंदी कविता में गए कुछ

दशकों में दलित-विमर्श के उजाले में चेतना की नई रोशनाई से लिखी गई कविताओं की विचलित कर देने वाली दुनिया सामने आई है। यह चयन ऐसी ही दुनिया के बीच से किया गया है।

quote

दलित के सत्ता विमर्श में एक कबीर का, एक अम्बेडकर होना भी अगर नहीं भाता; तो इस नव ब्राह्मणवादी पेटूवाद को क्या कहा जाए, जो कुछ प्रगतिशील दिमाग़ों में भी बैठा हुआ है।

सुधीश पचौरी
quote

यज्ञ करने और करानेवालों का यही उद्देश्य है कि वही पिछड़ी हुई रुग्ण मानसिकता बनी रहे, जिससे वर्ण और वर्ग-भेद बने रहें। वही मानसिकता बनी रहे कि हरिजन दूल्हा घोड़े पर बैठे, तो ऊँची जाति के लोग भड़ककर कहें—'देखो इस ‘चमरे’ की हिम्मत, हमारे सामने घोड़े पर बैठता है।'

हरिशंकर परसाई
quote

कबीर के होने होने से सत्ता बदलती है। कबीर के बदलने से, उसके पाठ के बदलने से सत्ता बदलती है। कबीर जाता है, तो एक इतिहास खंड में विच्छिन्नता पैदा हो जाती है। उसका सातत्य भंग हो जाता है और वेदवादी वर्णवादी गर्व खंडित हो जाता है, और हिंदुत्व के एजेंडे की समस्या बढ़ जाती है।

सुधीश पचौरी
quote

दलित साहित्य को व्यापक जीवन के दलित विमर्श के भीतर ही पढ़ा जा सकता है। यही दलित की देह गाथा है, जिस पर वर्णवादी इतिहास अपनी इबारत लिखता रहा है।

सुधीश पचौरी
quote

सरकार ने हरिजनों आदमियों की समस्या पर इस तरह कमीशन बिठाया है, जैसे अभी पहली बार मालूम हुआ है कि कुछ ऐसे प्राणी भी हैं, जो हरिजन और आदिवासी कहलाते हैं।

हरिशंकर परसाई
quote

छठी-सातवीं शताब्दी के आसपास भारतीय इतिहास में भक्ति की जो ऐतिहासिक क्रान्तिकारी घटना हुई थी, उसका जन्म लोकजीवन में हुआ था, लोकभाषा में हुआ था। उसका श्रेय आदि-अद्विज अब्राह्मणों को है। इसे दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों ने शुरू किया था।

नामवर सिंह
quote

अछूत दलित की अवमानना की अवस्था केवल व्यक्तिगत नहीं होती।

यू. आर. अनंतमूर्ति

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए