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अंचित

1990 | पटना, बिहार

नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन में भी सक्रिय।

नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन में भी सक्रिय।

अंचित के बेला

31 दिसम्बर 2025

...फिर इस साल का आख़िरी ख़त

...फिर इस साल का आख़िरी ख़त

एमजे, परंपराएँ कवियों को कहीं का नहीं छोड़तीं। ऐसे ही दिनचर्या की आदत। यह चाहते हुए भी कि किसी तरह की आदत बुरी न बने, कई नशे आदमी ज़िंदगी में ओढ़ लेता है। एक बहुत भारी साल के तमाम होते-होते, जिस इ

18 दिसम्बर 2025

पटना पुस्तक मेला : भर्त्सना के शिल्प में

पटना पुस्तक मेला : भर्त्सना के शिल्प में

मूर्खताओं के उदाहरण से हमारी सदी पटी हुई है और अब मूर्खताएँ हिंसा में बदल गई हैं। यह कहते हुए कोई सुख नहीं होता और न ही कोई चुटकुला सूझता है। व्यंग्यों के आधिक्य के बीच कभी-कभी क्रूर अभिधात्मकता की ओ

29 अगस्त 2025

वापसियों की यात्रा क्या त्रासदियों के अंत से शुरू होती है?

वापसियों की यात्रा क्या त्रासदियों के अंत से शुरू होती है?

अचानक ही तुम्हें अपनी भटक का उद्गम मिल गया है। वह इतना अस्ल है कि तुम उससे घबरा गए हो। तुम चाहते हो, तुम जितनी जल्दी हो सके—उसे भाषा में उतार दो। भले ही वह अधूरा ही उतरे, लेकिन क़ुबूल हो जाए। भले उसक

26 जून 2025

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

उल्टी धार के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए। परेशानियों का शुक्रिया कहना चाहिए। अधम मनुष्यों से दूर रहना चाहिए। कविता में सूक्तियों के बारे में जो सोचते हो, गद्य में अगर सूक्तियाँ बन जाती हों, तो उनको बन

31 दिसम्बर 2024

...इस साल का आख़िरी ख़त

...इस साल का आख़िरी ख़त

एमजे के लिए इस साल का आख़िरी ख़त एक बीत गए में कुछ जोड़ना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल है उसे याद करना। एक ताख़े पर कुछ किताबें जुड़ जाती हैं, जैसे उनका कुछ ख़ुद से जुड़ जाता है। एक मन होत

26 जून 2024

विरह राग में चंद बेतरतीब वाक्य

विरह राग में चंद बेतरतीब वाक्य

महोदया ‘श’ के लिए  एक ‘स्त्री दुःख है।’ मैंने हिंदी समाज में गीत चतुर्वेदी और आशीष मिश्र की लोकप्रिय की गई पतली-सुतली सिगरेट जलाते हुए एक सुंदर फ़ेमिनिस्ट से कहा और फिर डर कर वाक्य बदल दिया—

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