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एक पत्र का उत्तर

ek patr ka uttar

मक्सिम तान्क

अन्य

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मक्सिम तान्क

एक पत्र का उत्तर

मक्सिम तान्क

और अधिकमक्सिम तान्क

    ओह कितना छोटा ख़त

    तुमने भेजा है मेरे ख़त के जवाब में

    नोट-बुक में से फाड़ा गया

    एक छोटा-सा पृष्ठ भी

    तुम पूरा नहीं भर सकीं

    तुम्हें कोई शब्द प्यार का

    नहीं मिला

    कोई मार्मिक शब्द

    जो दुनिया की सारी चीज़ों में

    गरमी और रोशनी ला देता है

    निश्चय ही

    तुम लिख सकती थीं

    मौसम के बारे में

    या और कोई बात

    जिनके बारे में आदमी

    अक्सर लिखते हैं

    जब उन्हें आपस में कहने को

    कुछ नहीं होता है

    निश्चय ही

    तुम ज़िक्र कर सकती थीं

    शरद् ऋतु के बारे में

    काटेज के पास उगे

    दो रोआन वृक्षों के बारे में

    नंगे खेतों पर फैले

    आग के धुएँ के बारे में

    सिहरते आसमान में

    उड़ते सारसों के बारे में

    निश्चय ही

    जब तक तुम ख़त को ख़त्म करतीं

    उसे इंतज़ार करना होता

    जिसने तुम्हारा द्वार खटखटाया

    निश्चय ही

    देगची में उबलते आलू जल गए होते

    या बिलौटा डोरी में उलझ गया होता

    नोट-बुक में से फाड़ा गया

    एक छोटा-सा पृष्ठ भी

    तुम पूरा नहीं भर सकीं

    जब मैं तुम्हें लिखता हूँ

    तब ख़त में जगह

    कभी काफ़ी नहीं लगती

    इसलिए उसे समाप्त करता हूँ

    एक गर्म चुंबन के साथ

    जो टिकट के नीचे छिपा होता है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक सौ एक सोवियत कविताएँ (पृष्ठ 196)
    • रचनाकार : मक्सिम तान्क
    • प्रकाशन : नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली
    • संस्करण : 1975

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