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Swami Shraddhanand

1856 - 1926 | جالندھر, پنجاب

کی

संसार नेताओं के पीछे चलता है, चाहे कितनी भी स्वतंत्रता की टाँग तोड़ी जाए। नेता चाहे संसार को डुबा दे और चाहे तार दें, लोग चलेंगे नेताओं के पीछे हो।

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जिसकी लाखों मूर्ख प्रशंसा करें और दूसरी ओर एक सदाचारी धर्मात्मा ज्ञान उसके आचार को दूषित समझें तो तत्त्वज्ञानी धर्मात्मा की सम्मति ही ठीक है।

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