कैथरीन मैंसफ़ील्ड के उद्धरण
जीवन में हर वह चीज़ जिसे हम वास्तव में स्वीकार करते हैं, उसमें बदलाव आता है। इसलिए दुख को प्रेम बनना चाहिए। यही रहस्य है।
मैं पहले एक लेखिका हूँ और उसके बाद एक स्त्री हूँ।
अगर तुम जीना चाहते हो तो तुम्हें पहले अपने अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहिए।
दूसरों की राय और उन आवाज़ों की परवाह न करें। अपने लिए धरती पर सबसे कठिन काम करें। अपने लिए काम करें। सच्चाई का सामना करें।
सच्चाई यह है कि उपन्यासों का प्रत्येक सच्चा प्रशंसक इस सुखद विचार को सँजोता है कि वह अकेला—ध्यान से पढ़कर—उनके लेखक का गुप्त मित्र बन गया है।
जीवित रहना और एक लेखक होना ही काफ़ी है।
एकमात्र जीवन ही है जिसकी मुझे परवाह है—लिखना, कभी-कभार बाहर जाना और देखना और सुनना और उसके बाद वापस आकर फिर से लिखना। मैंने यही जीवन चुना है।
जब हम अपनी असफलताओं को गंभीरता से नहीं लेना शुरू करते हैं, तो इसका मतलब है कि हम उनसे डरना बंद कर रहे हैं।
जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहता है जो वही किताब पढ़ता है जिसे वह पढ़ता है तो पढ़ने का आनंद दोगुना हो जाता है।
मैं वर्तमान में एकांतवासी हूँ और कुछ नहीं करती, सिवाय लिखने और पढ़ने और पढ़ने और लिखने के।
इसे जीवन का नियम बना लें कि कभी पछताना नहीं है और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना है। पछताना ऊर्जा की एक भयावह बर्बादी है, आप इसे और आगे नहीं बढ़ा सकते; यह केवल आत्मदया के लिए अच्छा है। कोई भी व्यक्ति जो लेखक बनना चाहता है, वह इसमें लिप्त नहीं हो सकता।
डर की उपस्थिति को स्वीकार करना विफलता को जन्म देना है।
मुझे लगता है कि मैं हमेशा लिखती रहती थी। यह बकवास भी था। लेकिन कुछ भी न लिखने से बेहतर है कि बकवास या कुछ भी लिखा जाए।
हमारे प्यार की वजह से पूरी दुनिया हमारी होगी।
आप जानते हैं कि एक महान् लेखक आपको कैसा एहसास देता है : मेरी आत्मा को पोषण और ताज़गी मिली है, उसने कुछ नया खाया है।
मैंने ख़ुद को एक कालातीत टैक्सी में अनंतकाल से गुज़रते हुए देखा।
मैंने हमेशा महसूस किया है कि दोस्ती का सबसे बड़ा विशेषाधिकार, राहत और आराम यह है कि किसी को कुछ भी समझाने की ज़रूरत नहीं है।
…यही लिखने की संतुष्टि है कि कोई इतने सारे लोगों की नक़ल कर सकता है।
मैं हमेशा अपने अंदर छिपे विघटन के प्रति सचेत रहती हूँ।
मैं जिस मन से प्यार करती हूँ, उसमें जंगली जगहें होनी चाहिए।
मुझे ऐसे टेलीग्राम से बहुत डर लगता है, जब मुझसे पूछा जाता है कि मैं कैसी हूँ! मैं हमेशा यह उत्तर देना चाहती हूँ—‘मर गई।’