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सूर्य पर कविताएँ

सूर्य धरती पर जीवन का

आधार है और प्राचीन समय से ही मानवीय आस्था का विषय रहा है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया और उसकी स्तुति में श्लोक रचे गए। इस चयन में सूर्य को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

उस रोज़ सूर्य

विनोद कुमार शुक्ल

दुपहरें

यानिस रित्सोस

अफ़्रीक़ा की याद

जुज़ेपे उंगारेत्ती

बच्चे और सूरज

इराज ज़ियाई

सूर्यास्त

आलोकधन्वा

शोकगान

होर्खे लुइस बोर्खेस

आऊँगा मैं

ओसिप मंदेलश्ताम

एक असाधारण जोखिम

व्लादिमीर मायाकोव्स्की

सूर्य किरण

कानेको मिसुजु

जम जाएँगे ठंड से दो सूर्य

मारीना त्स्वेतायेवा

फ़ौलादी सूरज

रोद्रीगो रोख़ास

न बुझी आग की गाँठ

केदारनाथ अग्रवाल

मेरे सूर्य

निलय उपाध्याय

संधि की दिशा

अखिलेश सिंह

वो आदमी

ज्योति शर्मा

सूर्य

केदारनाथ सिंह

महाकुंभ

निधीश त्यागी

साँझ

शुभम् आमेटा

सुबह का इंतज़ार

दिलीप शाक्य

चिड़िया

सुमन शेखर

ज़िद मछली की

इला कुमार

अपवर्तन

अमृत रंजन

जपा कुसुम संकाशं

प्रतिभा शतपथी

चाँद और सूरज

दामिनी यादव

रात जब सो रही है

चित्रा सिंह

नवंबर

गंगा प्रसाद विमल

दी हुई नींद

अभिज्ञात

माँ और सुरुज देव

दीपक जायसवाल

रोटी

सोनू यशराज

प्राण-वायु की तरह

देवेंद्र 'देव'

साबुत

प्रेमा झा

सुरूज

अशोक कुमार दत्त

पहाड़ों के जलते शरीर

वंशी माहेश्वरी

आख़िर कब तक

रमेश प्रजापति

पृथ्वी और सूर्य

नरेंद्र जैन

सूरज की वापसी

रमेश प्रजापति

सूर्यास्त

रश्मि रमानी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere