मैं कोई मतदान नहीं करूँगा। कर नहीं चुकाऊँगा। किसी पंक्ति में खड़े होकर क्यू नहीं बनाऊँगा। कोई उपाधि, सम्मान, लाइसेंस, बीमा, पासपोर्ट, परमिट, पद या पोर्टफ़ोलियों नहीं लूँगा। मैं सामाजिक सुरक्षा नहीं चाहता। बहीखाते ढोने और औरों के लिए कंधे पर बंदूक़ें ढोने और गोली चलाने के बजाय मैं जंगलों और गुफाओं में चला जाऊँगा…।
स्त्रियों की सुरक्षा का विचार अभी भी पुरुषों के मन से नहीं गया है। यह आपकी स्त्री दयालुता और सुरक्षा में एक इच्छुक आधिपत्य का सुझाव देता है।
सुरक्षा जीवन का नकार है।
भयग्रस्त तो इतना दीन होता है कि उदात्त कंठ से कोई भाषा बोल ही नहीं सकता।
प्रत्येक व्यक्ति की बात सुनो परंतु किसी से भी कुछ मत कहो। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा निंदा सुन लो पर अपना निर्णय सुरक्षित रखो।
जागतिक संघात से पैदा होनेवाली ऊब, उच्चाटन और अवसाद से मनुष्य की रक्षा करने में हिंदू कर्मकाण्ड की कला-मुद्रा की विशिष्ट भूमिका है।
वंचना से धन का संग्रह कर उसकी रक्षा करना, कच्चे घड़े में जल भर कर उसकी रक्षा करने के समान होता है।
स्वामी से द्रोह न करना धर्म है, किंतु भय के कारण धर्म भी छोड़ा जा सकता है। इसलिए धार्मिक होने के साथ-साथ निर्भीक व्यक्ति को ही अंत:पुर का पहरेदार नियुक्त करना चाहिए।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere