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दर्द पर ग़ज़लें

‘आह से उपजा होगा गान’

की कविता-कल्पना में दर्द, पीड़ा, व्यथा या वेदना को मानव जीवन के मूल राग और काव्य के मूल प्रेरणा-स्रोत के रूप में स्वीकार किया जाता है। दर्द के मूल भाव और इसके कारण के प्रसंगों की काव्य में हमेशा से अभिव्यक्ति होती रही है। प्रस्तुत चयन में दर्द विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कबो झील तितली

जौहर शफियाबादी

आदमी जानवर बन

ए. कुमार ‘आँसू’

तन के तितली

जौहर शफियाबादी

गढ़ाइल जे रहे मुरत

कृष्णानन्द कृष्ण

पाँव कतनो जरी

गहबर गोवर्द्धन

जहर नस-नस चढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

दिल के सुलझी

जौहर शफियाबादी

जागल बा दिल

मिथिलेश ‘गहमरी’

हवा में बा

जगन्नाथ

साध सावन के

जौहर शफियाबादी

आदमी आदमी में होखेला

जौहर शफियाबादी

भोर आके कतो

जगन्नाथ

अवधारि बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

उपहास बनल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

रो-रो के सनेहिया

जौहर शफियाबादी

ऊखम से फूल

जौहर शफियाबादी

आ रहल बेसम्हार पानी फिर

तैयब हुसैन पीड़ित

दरद जिन्दगी के सजा

जौहर शफियाबादी

तनी देख लीं ना

मिथिलेश ‘गहमरी’

ना सुने के

गहबर गोवर्द्धन

मकान बा सटल-सटल

कृष्णानन्द कृष्ण

साँस पर राग

गहबर गोवर्द्धन

पूछत बा लोग

जौहर शफियाबादी

खाली चिनमार हमर

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

चाल चाहे जे चलस

कृष्णानन्द कृष्ण

दरदे अबले उपहार

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

पूरल ने एको आस हिया

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

अइसन बिगड़ल हवा के असर देख लीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव 2026

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