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दर्द पर गीत

‘आह से उपजा होगा गान’

की कविता-कल्पना में दर्द, पीड़ा, व्यथा या वेदना को मानव जीवन के मूल राग और काव्य के मूल प्रेरणा-स्रोत के रूप में स्वीकार किया जाता है। दर्द के मूल भाव और इसके कारण के प्रसंगों की काव्य में हमेशा से अभिव्यक्ति होती रही है। प्रस्तुत चयन में दर्द विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने

गोपाल सिंह नेपाली

मीले ना सँवरिया हमार

भोलानाथ गहमरी

हम केकर केकर हाल बताईं

रामजियावान दास ‘बावला’

ना अइलऽ बरिसात में

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

तुरत सम्हरू

मार्कण्डेय प्रवासी

हम नदी के दो किनारे

विशाल समर्पित

मेघ इन्द्रनील

शान्ति सुमन

रएनियाँ बिलमे ना...

अशोक द्विवेदी

तार-तार मसक गइल

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

गायक से

भोलानाथ गहमरी

पूर्ण मन की यह एषणा कर सकूँ

विकास आर्य स्वप्न

ककर ई दोष

छत्रानन्द सिंह झा

स्नेह-रिक्त की होयत मन?

छत्रानन्द सिंह झा

गुत्थियाँ उलझी रहेंगी

प्रदीप बहराइची

पटना से बैदा बोलाइ दऽ

महेन्द्र मिसिर

साँझक निसान

शान्ति सुमन

यदि दर्द न होता

रमानाथ अवस्थी

मन को छोटा कर लूँ

प्रदीप बहराइची

पीड़ा से गीत बुने हमने

स्वरिका कीर्ति

दर्द की कहानी

विनम्र सेन सिंह

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव 2026

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