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प्रकृति पर गीत

प्रकृति-चित्रण काव्य

की मूल प्रवृत्तियों में से एक रही है। काव्य में आलंबन, उद्दीपन, उपमान, पृष्ठभूमि, प्रतीक, अलंकार, उपदेश, दूती, बिंब-प्रतिबिंब, मानवीकरण, रहस्य, मानवीय भावनाओं का आरोपण आदि कई प्रकार से प्रकृति-वर्णन सजीव होता रहा है। इस चयन में प्रस्तुत है—प्रकृति विषयक कविताओं का एक विशिष्ट संकलन।

एक पेड़ चाँदनी

देवेंद्र कुमार बंगाली

रचा-सृजा मुझे

विभूति तिवारी

अनंत उल्लास

गोपालशरण सिंह

गंध मदन के

भोलानाथ गहमरी

बसन्त रितु रंग भरे

अशोक द्विवेदी

दृष्टि

राघवेंद्र शुक्ल

भऽ गेलै परात

राम चैतन्य धीरज

आइल सरद मुसुकात

भोलानाथ गहमरी

सुभ सुभ सुभ नया साल हो

रामजियावान दास ‘बावला’

वन कटान

रामजियावान दास ‘बावला’

हमरो गाँव रे

भोलानाथ गहमरी

सखि फागुन आइल

रामजियावान दास ‘बावला’

बरखा बहार

भोलानाथ गहमरी

डोले सरद बयार

भोलानाथ गहमरी

एक दिया बार के

भोलानाथ गहमरी

घरी दो घरी नहीं

श्यामबिहारी श्रीवास्तव

सामाक तानमे

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

मधु ऋतु

शंभुनाथ सिंह

वन-रोदन

गोपालशरण सिंह

गुमनाम पत्ते

देवेंद्र कुमार बंगाली

ओ री मानस की गहराई

जयशंकर प्रसाद

झरना

जयशंकर प्रसाद

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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