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संगीत पर गीत

रस की सृष्टि करने वाली

सुव्यवस्थित ध्वनि को संगीत कहा जाता है। इसमें प्रायः गायन, वादन और नृत्य तीनों शामिल माने जाते हैं। यह सभी मानव समाजों का एक सार्वभौमिक सांस्कृतिक पहलू है। विभिन्न सभ्यताओं में संगीत की लोकप्रियता के प्रमाण प्रागैतिहासिक काल से ही प्राप्त होने लगते हैं। भर्तृहरि ने साहित्य-संगीत-कला से विहीन व्यक्ति को पूँछ-सींग रहित साक्षात् पशु कहा है। इस चयन में संगीत-कला को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

देवसेना का गीत

जयशंकर प्रसाद

जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने

गोपाल सिंह नेपाली

कार्नेलिया का गीत

जयशंकर प्रसाद

रोने वाला ही गाता है

गोपालदास नीरज

मोनक वैशालीमे

मार्कण्डेय प्रवासी

आज तार मिला

महादेवी वर्मा

गायक से

भोलानाथ गहमरी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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