Font by Mehr Nastaliq Web

प्रेम पर पद

प्रेम के बारे में जहाँ

यह कहा जाता हो कि प्रेम में तो आम व्यक्ति भी कवि-शाइर हो जाता है, वहाँ प्रेम का सर्वप्रमुख काव्य-विषय होना अत्यंत नैसर्गिक है। सात सौ से अधिक काव्य-अभिव्यक्तियों का यह व्यापक और विशिष्ट चयन प्रेम के इर्द-गिर्द इतराती कविताओं से किया गया है। इनमें प्रेम के विविध पक्षों को पढ़ा-परखा जा सकता है।

नीवी करषत बरजत

कृपानिवास

वंशी माधुरी

विद्यापति

पिया हो, कसकत कुस पग बीच

सुधाकर द्विवेदी

हरि को भलौ मनाइये

परमानंद दास

जागत सब निसि कहाँ रहे

गोविंद स्वामी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere