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जीना पर कविताएँ

वे चले गए

रफ़ाइल अलबर्ती

क़त्ल

यूजीनियो मोंताले

चौक

होर्खे लुइस बोर्खेस

उतनी ही जगह में

सी. पी. कवाफ़ी

उत्तरजीवी

तादेऊष रूज़ेविच

एक नज़्म

अहमद शामलू

मरे हुओं को बचा लो

डेविड इग्नटाओ

मैं सरलता से जीती हुई ख़ुश हूँ

मारीना त्स्वेतायेवा

मैंने प्रिय नाम जिया

ओदीसियस एलाइतिस

ग़लत नंबर

वीस्वावा षिम्बोर्स्का

भीतर के आग

ब्रजभूषण मिश्र

जीवन-कामनाक डोरि

ललितेश मिश्र

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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