शंखनाद : शेरू : हमारा पहला एंटी-हीरो
शेरू हमारे परिवार का, मेरे जानने में, पहला और आख़िरी पालतू कुत्ता था। बड़े भाई साहब उस समय 14-15 साल के रहे होंगे, जब वह उसके दूध-से सफ़ेद रंग और नई दुल्हन-सी अधखुली आँखों की मासूमियत पर फ़िदा हो गए।
शंखनाद : नौवीं फ़ेल डॉ. साहब
भगवत् कृपा से, कुछ अपने करम और कुछ दूसरों की मेहरबानी से, जीवन में किसी और चीज़ की भले ही कमी हो, बदनाम होने और बेइज़्ज़त होने के मौक़ों की कोई कमी नहीं रही। मज़े की बात यह है कि अभी भी इसमें कोई कमी
शंखनाद : बनियान, बुल दुबे और बाक़ी असफलताएँ
पढ़ाई-लिखाई में डबल-बिलो औसत प्रदर्शन के बाद हमने यह स्वीकार कर लिया कि संप्रति यह हमारा क्षेत्र नहीं है और अपनी पहचान किसी दूसरे क्षेत्र में तलाशनी चाहिए। कुलदीप की राय थी कि हमें डॉक्टर बनने की
दास्तान-ए-गुरुज्जीस
एम.ए. (दूसरे साल) के किसी सेमेस्टर में पाठ्यक्रम में ‘श्रीरामचरितमानस’ पढ़नी थी। अब संबंध ऐसे घर से था—जहाँ ‘श्रीरामचरितमानस’ और ‘श्रीदुर्गासप्तशती’ पूजा-पाठ के क्रम में पढ़ने के साथ ही, बुज़ुर्गों द
01 अप्रैल 2025
विश्वनाथ शर्मा ‘विमलेश’ से सुरेंद्र शर्मा तक
उनका पूरा नाम विश्वनाथ शर्मा ‘विमलेश’ था। ‘विमलेश राजस्थानी’ भी उन्हें कहा जाता था और कवियों के बीच वह विमलेशजी के नाम से मशहूर थे। विमलेशजी की चार लाइनों और उनके पढ़ने की नक़ल करने वाले सुरेंद्र शर