‘कोर्ट मार्शल’ की सवर्ण सीमा : जब दलित बोलने लगे तो नाटक ख़त्म हो जाता है
चंडीगढ़ आने के कुछ साल बाद मेरी माँ की क़रीबी दोस्त वहाँ अपने ननिहाल आईं तो मुझे भी अपनी मौसी के घर ले गईं। बुज़ुर्ग मौसी ने बड़े स्टाइल से दोपहर का भोजन कराया। कई स्वादिष्ट सब्ज़ियाँ और अचार थे। नौक
क्या जेल वास्तव में मानवीय होती हैं?
सजा और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच, नॉर्वे अपने यहाँ की जेलों को एक ऐसे सामाजिक प्रयोग में बदल रहा है, जो न्याय की वैश्विक धारणाओं को चुनौती देता है। दक्षिणी ओस्लो के एक छोटे से द्वीप पर क़ैदी अपने द
अस्सी : ‘तय करो, इसके नीचे हम नहीं फिसलेंगे’
‘अस्सी’ आपको झकझोरती है, असहज करती है। वह ऐसे प्रश्न सामने रखती है, जिन्हें हम वर्षों से टालते आए हैं। वह हमें हमारे ही समय के कठोर सच से रूबरू कराती है। क्यों आज भी इस देश में प्रतिदिन लगभग अस्सी बल
इस संसार की सुंदरता स्त्रियों के कंधे पर ही है
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama) 23 अगस्त से 9 सितंबर 2024 के बीच हीरक जयंती नाट्य समारोह आयोजित कर रहा है। यह समारोह एनएसडी रंगमंडल की स्थापना के साठ वर्ष पूरे होन