मेरी पहली जेल-यात्रा-2
यहाँ से आगे... रात भर यही सोच कर नींद लगी कि कल नहीं जाऊँगी, जाना ठीक नहीं, क्या पता कल और ख़राब न बीते। सिर का दर्द अगर कल भी बना रहा तो अगले कई रोज़ तक यही डेरा लगा रहेगा इसका, ऑफ़िस अपना पढ़ना-
मेरी पहली जेल-यात्रा
जीवन के पेच-ओ-ख़म इतने जटिल होते हैं कि हर बार कविता, कहानी या किरदार आपको बचा नहीं पाता है। ऐसे ही आप समाज के भीतर से हाशिए की ओर जाते हैं; हाशिए से भीतर आते हैं, ताकि अपनी ओर की यात्रा में उकताहट क
क्या जेल वास्तव में मानवीय होती हैं?
सजा और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच, नॉर्वे अपने यहाँ की जेलों को एक ऐसे सामाजिक प्रयोग में बदल रहा है, जो न्याय की वैश्विक धारणाओं को चुनौती देता है। दक्षिणी ओस्लो के एक छोटे से द्वीप पर क़ैदी अपने द
एक थकी हुई तितली
मैंने इतने क़रीब से कभी मोर नहीं देखा था। यहाँ शुरुआत कुछ और कहकर भी हो सकती है, लेकिन मोर ही क्यों, यह नहीं मालूम। शायद उस दुपहर का सबसे गहरा रंग, मुझे उस मोर में दिखाई दिया था। मोर अपनी गहरे नीले रं