
मनुष्य अकेला नहीं है, वह समग्र से जुड़ा हुआ है, अनेकों पर उसकी निर्भरता अपरिहार्य है।

धरती तो अपने कण-कण में अभिनव है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
मनुष्य अकेला नहीं है, वह समग्र से जुड़ा हुआ है, अनेकों पर उसकी निर्भरता अपरिहार्य है।
धरती तो अपने कण-कण में अभिनव है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere