Font by Mehr Nastaliq Web

आलिंगन पर उद्धरण

quote

परस्पर प्रीति को उत्पन्न करने वाले अपने अनुकूल आलिंगनादि भावों के अनुसरण से, क्षणभर में नाराज़ होकर मुख फेर लेने से और क्षणभर में ही, परस्पर प्रेम भरी निगाहों से देखने से रति की इच्छा बढ़ती है।

वात्स्यायन
quote

जब दीवार या खंभे को दोनों ओर से पकड़ कर; नायक-नायिका परस्पर एक-दूसरे को ज़ोर से दबाएँ, तो वह 'पीड़ितक' आलिंगन कहलाता है।

वात्स्यायन
quote

शाल वृक्ष पर लिपटती हुई लता के समान, नायिका जब नायक का मुख चूमने के लिए उसके मुख को थोड़ा झुकाए, फिर उठाकर सी-सी करती हुई; उससे लिपटकर उसके मुख-सौंदर्य को देखे, तो यह आलिंगन 'लतावेष्टितक आलिंगन' कहलाता है।

वात्स्यायन
quote

नायक-नायिका अत्यधिक कामांध होकर; किसी प्रकार की हानि की परवाह करके, एक ही पलंग पर नायिका नायक की गोद में बैठकर अथवा एक-दूसरे के आमने-सामने बैठकर; परस्पर एक-दूसरे से इस प्रकार चिपट जाएँ, मानो एक-दूसरे के अंदर समा जाना चाहते हों, तो इस प्रकार के आलिंगन को 'क्षीरजलक' आलिंगन कहते हैं।

वात्स्यायन
quote

यदि आलिंगन करने पर नायिका उठकर खड़ी हो जाए और पुनः दूसरे दिन कुपित होकर; प्रसन्न होकर उसके सामने आए, तो समझ ले कि अभी वह मिलना ही पसंद करती है। यदि वह प्रगल्भा नायिका दूसरे दिन भी नाराज़ होकर चली जाए, तो दूती के द्वारा सिद्ध करना चाहिए।

वात्स्यायन
quote

नायिका जब एक पैर से नायक के पैर को दबाते हुए, दूसरे पैर से उसकी जंघाओं को संपीडित करे और एक बाँह से उसकी पीठ का आलिंगन करती हुई, दूसरी बाँह से उसके कंधे को झुकाकर; मंद सीत्कार के साथ उसके मुख को चूमने के लिए उस पर चढ़ने का प्रयत्न करती है—तब उस आलिंगन को ‘वृक्षाधिरूढ़क’ कहा जाता है।

वात्स्यायन
quote

जब नायिका लेटे हुए अपने एक जंघा से नायक की जंघा को दबाकर, अपने बालों और बाँहों को फैलाकर नखक्षत, दंतक्षत, प्रहणन और चुम्बनादि आलिंगन करने के लिए पुरुष के ऊपर लेट जाए, तो 'जघनोपगूहन' आलिंगन कहलाता है।

वात्स्यायन
quote

अंधकार में, भीड़-भाड़ में अथवा एकांत में धीरे-धीरे चलते हुए; नायक-नायिका दोनों के शरीर का अधिक देर तक घर्षण हो, तो 'उद्धृष्टक' आलिंगन कहलाता है।

वात्स्यायन
quote

जैसे तिल और चावल एक दूसरे से मिल जाते हैं, वैसे ही शय्या पर लेटे हुए नायक-नायिका; दोनों अपनी भुजाओं, जंघाओं को परस्पर एक-दूसरे से सटाकर, मर्दन करते हुए प्रगाढ़ आलिंगन करें, तो वह 'तिलतंडुलक' आलिंगन कहलाता हैं।

वात्स्यायन
quote

जब नायक-नायिका एक-दूजे से अत्यधिक परिचित हुए हों, ऐसे में नायिका जब एकांत में अपने प्रेमी को खड़ा हुआ या बैठा हुआ देखे, तो किसी वस्तु को लेने के बहाने उसे अपने स्तनों से नायक को स्पर्श करने की कोशिश करनी चाहिए और नायक को भी उसका अच्छी तरह आलिंगन करना चाहिए। इस तरह का आलिंगन 'विद्धक आलिंगन' कहलाता है।

वात्स्यायन
quote

जब नायक नायिका के साथ सामने मुख करके करवट लेटकर, अपनी एक जाँघ अथवा दोनों जंघाओं से एक-दूसरे को पूर्ण शक्ति के साथ दबाए, तो 'ऊरूपगूहन' नामक आलिंगन होता है।

वात्स्यायन
quote

यदि पत्नी विवाह के पूर्व परिचिता है, तो उन्मत्तयौवना पत्नी का दीपक के प्रकाश में आलिंगन करना चाहिए और यदि विवाह के पहले दोनों का पूर्व परिचय हो, तो अभुक्तपूर्वा लज्जाशील बाला का अंधकार में आलिंगन करना चाहिए।

वात्स्यायन
quote

अतिपरिचित नहीं हुई प्रेमिका अगर सामने से रही हो, तो जाते हुए उसके शरीर को अपने शरीर से किसी बहाने से स्पर्श कराना, 'स्पृष्टक' आलिंगन कहलाता है।

वात्स्यायन
quote

जब नायिका अपने मुख को नायक के मुख से सटाकर और आँखों को आँखों से मिलाकर; ललाट से ललाट को दबाए, तो 'ललाटिया' आलिंगन कहा जाता है।

वात्स्यायन
quote

जब नायिका अपने स्तनों को नायक की छाती में गड़ाकर; स्तनों के भार से उसकी छाती को ज़ोर से दबाए, तो 'स्तनालिंगन' कहलाता है।

वात्स्यायन

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए